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केंद्र-राज्य में टकराव, 2026 चुनाव पर भी असर
कोलकाता। अलीपुर चिडिय़ाघर से 321 जानवरों के 'निखोज़' होने का मामला अब राजनीति का रंग ले चुका है। राज्य की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि एक भी जानवर ग़ायब नहीं हुआ, असल गड़बड़ी केंद्रीय रिपोर्ट में है। लेकिन इस मुद्दे पर अब केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने खड़े हो गए हैं। राज्य वन विभाग का कहना है कि अलीपुर चिडिय़ाघर ने सही आँकड़े भेजे थे, लेकिन केंद्र के पास से ग़लत रिपोर्ट जारी हुई। सूत्रों का दावा है कि राज्य ने केंद्र से रिपोर्ट सुधारने को कहा था, मगर अनदेखी की गई। अब इस ग़लती को राज्य राजनीतिक साजि़श के तौर पर देख रहा है। मंत्री बीरबाहा हांसदा ने रिपोर्ट को राहत भरा बताया, लेकिन इस मुद्दे पर खुलकर कुछ कहने से बचीं। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद केंद्र बनाम राज्य की जुबानी जंग को और हवा दे सकता है।
तृणमूल कांग्रेस इस मामले को राज्य की छवि खराब करने की कोशिश बता रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जंगल, पर्यावरण और जानवरों के प्रबंधन में राज्य विफल है, इसलिए ऐसे आरोप उठे। अदालत में मामला लंबित है, जिससे आने वाले दिनों में और राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ होने के आसार हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट में दाख़िल याचिका में कहा गया है कि ग़लतफ़हमी पिछले 30 सालों से है और अदालत से गुज़ारिश की गई है कि पिछले 10 सालों का पूरा हिसाब-किताब राज्य से माँगा जाए। अदालत का रुख़ इस विवाद में अहम साबित होगा। चिडिय़ाघर का मामला भले तकनीकी हो, लेकिन जनमानस में राज्य की विश्वसनीयता बनाम केंद्र की नीयत का नैरेटिव बन सकता है।
विपक्ष को मौका मिल गया है कि वह कहे अगर जानवरों के आँकड़े में गड़बड़ी हो सकती है, तो सरकार बाकी डेटा में भी कितनी पारदर्शी है? वहीं, सत्ताधारी दल इसे केंद्र की ग़लत रिपोर्ट से राज्य की बदनामी बताकर चुनावी मुद्दा बना सकता है।